Mohan Meakin : आपने कई यात्राएं की होंगी और ढेर सारे संस्मरण भी पढ़े होंगे. लेकिन आज हम आपको जिस यात्रा के बारे में बताने जा रहे हैं वह एक बियर (Beer) के सफर से जुड़ी हुई है. जी हां, एक बियर (Beer) का सफर… वह बियर (Beer) जो सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में पहली बियर के रूप में जानी जाती है. इस बियर (Beer) का रिश्ता जलियावाला बाग में नरसंहार का आदेश देने वाले ब्रिटिश हुकूमत के अफसर जनरल डायर से भी है. आइए पढ़ते हैं ये यात्रा और जानते हैं इतिहास के उस पन्ने को जिसे कम ही लोगों ने पलटा है.
Mohan Meakin एक बेहद बड़ी कंपनी है जिसकी शुरुआत एशिया की पहली ब्रेवरी कंपनी के तौर पर 1855 में हुई थी. हालांकि एडवर्ड डायर ने इससे भी बहुत पहले कंपनी की नींव भारत के हिमाचल प्रदेश के कसौली में डायर ब्रेवरीज के नाम से रख दी थी. बता दें कि एडवर्ड डायर के बेटे जनरल डायर (रेजिनाल्ड एडवार्ड हैरी डायर) ने ही ब्रिटिश शासन के अंतर्गत जलियाबाला बाग में 1919 में नरसंहार को अंजाम दिया था.
1820 के आखिरी में, एडवर्ड डायर इंग्लैंड से भारत आए. उनकी इस यात्रा का मकसद भारत में पहली ब्रेवरी की स्थापना करना ही था. उन्होंने भारत में पहली ब्रेवरी की स्थापना की जिसे 1955 में डायर ब्रेवरीज के नाम से जाना गया. कसौली ब्रेवरी ने भारत और एशिया की पहली बीयर की शुरुआत की जिसे Lion नाम दिया गया. Lion बियर की डिमांड ब्रिटिश प्रशासकों में बेहद ज्यादा थी. यही नहीं भारत की तपती गर्मी में अपना पसीना बहाने वाले ब्रिटिश सैनिक भी इसे खूब पीते थे. Lion बियर को खासा पसंद किया गया. इसका एक पोस्टर भी बेहद चर्चित हुआ जिसमें एक संतुष्ट ब्रिटिश यह कह रहा था- “as good as back home!”.
इस ब्रेवरी को जल्द ही नजदीकी सोलन में शिफ्ट कर दिया गया जो अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला के करीब था. इसकी बड़ी वजह पानी की आसान उपलब्धता थी. कसौली ब्रेवरी साइट को डिस्टिलरी में कनवर्ट कर दिया गया, जिसे Mohan Meakin Ltd. आज भी ऑपरेट करती है. डायर ने शिमला, मुरे, रावलपिंडी, मंडाले, क्वेटा में भी ब्रेवरीज लगाई और दक्षिण भारत के Ootacamund Brewery में शेयर भी खरीदे.
एक और कारोबारी, H. G. Meakin ने 1887 में भारत का रुख किया और ओल्ड शिमला व सोलन ब्रेवरीज को एडवर्ड डायर से खरीद लिया. उन्होंने रानीखेत, डलहौजी, चकराता, किर्की, नुवारा एलिया (श्रीलंका) में और भी ब्रेवरीज की शुरुआत ती. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद मीकिन और डायर ब्रेवरीज मर्ज हो गईं और 1937 में जब बर्मा का भारत से विघटन हुआ तब कंपनी भारतीय एसेट्स के साथ रीस्टर्क्चर्ड हुई. अब इसका नाम डायर मीकिन ब्रेवरीज हो गया, अब यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज में एक पब्लिक कंपनी थी.
आजादी के बाद, नरेंद्र नाथ मोहन ने फंड इकट्ठाकिए और लंदन तक का सफर तय करके डायर मीकिन ब्रेवरीज में बड़े स्टेक खरीद लिए. उन्होंने 1949 में कंपनी के मैनेजमेंट को टेकओवर कर लिया और लखनऊ, गाजियााद, खपोली में नई ब्रेवरीज की शुरुआत की. 1967 में कंपनी का नाम मोहन मीकिन ब्रेवरीज रख दिया गया.
1969 में मोहन के निधन के बाद उनके बड़े बेटे वीआर मोहन ने मैनेजिंग डायरेक्टर का पदभार संभाला. उन्होंने कई नए प्रोडक्ट्स शुरू किए जो आज ब्रैंड लीडर्स हैं लेकिन वीआर मोहन का निधन पदभार संभालने के कुछ ही समय बाद 1973 में हो गया. 1970 में कंपनी ने नए क्षेत्रों में प्रवेश किया जिसमें breakfast cereals, fruit juices और mineral water थे. ये काम कपिल मोहन के नेतृत्व में हुआ, जो वीआर मोहन के भाई थे. 1982 में कंपनी के नाम से ब्रेवरी हटा दिया गया क्योंकि यह सिर्फ बियर बनाने तक ही सीमित थी. चंडीगढ़, मद्रास, नेपाल, हैदराबाद के निकट काकीनाडा में नई ब्रेवरीज की शुरुआत की गई.
आज, मोहन मीकिन के प्रमुख ब्रैंड ओल्ड मोंक रम और गोल्डन ईगल बियर हैं. अन्य प्रोडक्ट्स में Diplomat Deluxe, Colonel’s Special, Black Knight, Meakin 10,000, Summer Hall और Solan No 1 whiskies, London Dry और Big Ben gins, व Kaplanski vodka हैं. एशिया की ओरिजिनल बियर Lion, आज भी उत्तर भारत में बिकती है..
Lion बियर ही वो मुख्य ब्रैंड है जिसे डायर ब्रेवरीज ने सबसे पहले 1840 के दशक में बेचना शुरू किया था. Lion एक IPA (India Pale Ale) थी लेकिन 1960 में बियर के स्टाइल को बदल दिया गया. Lion तब भी भारत में नंबर 1 बियर बनी रही. ये सिलसिला 1840 से चलकर 1960 तक पहुंच चुका था. मोहन मीकिन ने इसके बाद “Golden Eagle” ब्रैंड को मार्केट में उतारा जिसने 1980 तक खुद को नंबर-1 बनाए रखा. इसके बाद मार्केट किंगफिशर के नाम रहा. अब Lion की बिक्री कम हो चुकी थी और यह सिर्फ आर्मी कैंटीन में ही उपलब्ध रहती थी.
Lion ने एशिया की पहली बियर ब्रैंड बनकर इतिहास में खुद को दर्ज कराया है. Lion की प्रसिद्धी भारत से होकर न्यू जीलैंड, साउथ अफ्रीका तक जा पहुंची थी. Lionपड़ोसी मुल्क श्रीलंका में भी नंबर एक ब्रैंड बन गया था जिसे मोहन मीकिन ने 1880 के दशक में सीलन ब्रेवरी के जरिए मार्केट में उतारा था. ओल्ड मोंक कंपनी का सबसे चर्चित प्रोडक्ट है जिसे गाजियाबाद के मोहन नगर में मोहन मीकिन में निर्मित किया जाता है.
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