Goa Yatra, पहला दिन: Sea Food वाले रेस्टोरेंट में हम वेजिटेरियन खाना खा रहे थे!

मैं हवाई जहाज की खिड़की से आसमान में झांक रहा था, नीचे गोवा की सड़कें आंखों को अपनी ओर खींचने लगी. नजर नीचे दौड़ाई तो सड़कों का जाल मुझे कुछ ऐसा लगा जैसे दीपावली की लड़ियों को सलीके से वहां बिछा दिया गया हो. सड़कें दिल्ली जैसी चौड़ी तो नहीं थी लेकिन ट्रैफिक शांत और व्यवस्थित नजर आ रहा था. गाड़ियां हल्के हल्के रफ्तार में चले ही जा रही थीं. मैं उन्हें गौर से देख रहा था तभी प्लेन ने गोवा (Goa) एयरपोर्ट पर लैंड कर दिया. इस बीच जो एक आवाज जहन में गई वो ये थी कि गोवा (Goa) हवाईअड्डा एक सैन्य हवाईअड्डा है और यहां तस्वीरें खींचना वर्जित है. इससे पहले मुझे ये बात नहीं बता थी.

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शाम के 7 बज चुके थे. हवाई जहाज से उतरने के बाद हम बस में सवार हुए और एयरपोर्ट की बिल्डिंग में दाखिल हुए. मेरे साथ मेरे मित्र अमित भी थे. इसी वजह से अपनी इस दूसरी हवाई यात्रा में मुझे ज्यादा कुछ समझने विचारने की जरूरत नहीं पड़ रही थी. मैं हर बात उन्हीं से जान समझ लेता था. सूटकेस पुनः लेने के बाद हम बाहर की तरफ चल पड़े. गोवा (Goa) में ओला-ऊबर जैसी टैक्सी सर्विस नहीं है, वहां सीएनजी भी नहीं है. इसी वजह से आम टैक्सियां वहां बेहद महंगी हैं. हमने एयरपोर्ट से होटल पहुंचने के लिए पहले ही होटल की टैक्सी बुक कर ली थी. एयरपोर्ट से कलंगुट बीच पर स्थित हमारा होटल 40 किलोमीटर दूर था. इसके लिए हमने 1300 रुपये चुकाए.

एयरपोर्ट से निकले ही थे कि रास्ते में एक जगह हम चाय पीने के लिए रुके. यहां हमने 4 कटिंग चाय (हाफ कप) और थोड़े से पकौड़े लिए. इस पहले औपचारिक खर्च के लिए मैंने 20 रुपये चुकाए. गोवा (Goa) के लिए मैं दिल्ली से ही महंगाई सुनता चला आ रहा था लेकिन इस पहले खर्च ने मुझे चौंका दिया. दिल्ली में इसकी कीमत 40 रुपये से कम नहीं थी लेकिन 20 रुपये में निपट जाने के बाद मैं आगे के खर्च को लेकर थोड़ा आश्वस्त हो गया था. चाय पीने के बाद हम गाड़ी में बैठकर होटल की तरफ चल दिए. मौसम में थोड़ी उमस थी. इसे महसूस कर मुझे मुंबई की याद आ गई. मैं अक्सर ही अपने रिलेटिव्स के पास मुंबई जाता रहता हूं और हमेशा ही वहां कि उमस से परेशान रहता हूं.

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गोवा (Goa) में अब हम होटल पहुंच चुके थे. यहां एक और समस्या मुंह बाए खड़ी थी. हमने कुल 3 रूम बुक किए थे. एक मेरी फैमिली के लिए, एक अमित के लिए और तीसरा रूम उनके दोस्तों के लिए. अमित के दोस्त किसी कारण से ट्रिप कैंसल कर चुके थे और होटल की बुकिंग कैंसिल कराने में हम लेट हो चुके थे. खैर, इस बुकिंग खर्च को वापस शून्य पर ले आना मुमकिन नहीं था इसलिए हमने उस रूम को लेने का ही फैसला किया. अमित के एक दोस्त, जो स्थानीय कोंकणी चैनल के पत्रकार थे, वह वहां पहुंच चुके थे. हम सभी अपने अपने कमरों में चले गए. 30 मिनट में फ्रेश होने के बाद हम घूमने के लिए बाहर निकले.

चूंकि गोवा (Goa) में कहीं भी आने जाने के लिए पर्यटक स्कूटी का ही सहारा लेते हैं और हम इसमें लेट थे इसलिए हमारे पास सिवाय टैक्सी के कोई चारा नहीं था. हम होटल से 100 मीटर आगे आए और मुख्य सड़क से Tito’s Lane के लिए टैक्सी ली. Tito’s Lane की दूरी कुल 3-4 किलोमीटर ही रही होगी लेकिन टैक्सी का किराया 300 रुपये. हम सभी कुछ ही मिनटों में Tito’s Lane पहुंच चुके थे. इस लेन पर सही मायने में गोवा (Goa) की चमक दिखाई देती है. मैंने दिल्ली में हौजखास विलेज का दौरा किया है, और वहां के क्लब्स भी देखे हैं लेकिन रात के 10 बजे मैं पहली बार किसी ऐसे रास्ते पर था जहां क्लब्स और डिस्को की बहार थी.

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मुझे हैरानी एक ऐसे डिस्को को देखकर हुई जिसमें बाहर लिखा था- Free Entry and Free Drinks For Girls. इस क्लब में बाहर से ही लड़कियों का झुंड शराब के नशे में मदहोश होकर झूमता दिखाई दे रहा था. धुआं भी खूब उड़ रहा था. मेरी जरा भी दिलचस्पी ऐसे माहौल में नहीं है. मैंने सभी से निवेदन किया कि क्यों न किसी Beach पर चलकर आराम से बैठा जाए. सभी ने सहमति दी. कुछ ही देर में हम Baga Beach पहुंच चुके थे. हम एक Shack पर पहुंचे. मुझे और प्रीति को बहुत तेज भूख लगी थी. ग्रुप में बाकी 2 लोग भी थे, अमित और उनके दोस्त. वे दोनों नॉन वेजिटेरियन थे. मैं और प्रीति शाकाहारी थे. हमने मीनू उठाया ही था, कि तुरंत ही प्रीति और मैं एक दूसरे को देखने लगे. ये पूरी तरह एक Sea Food वाला Shack था. हम हमारे पास कोई दूसरा ऑप्शन था भी नहीं इसलिए हमने हारकर ऑर्डर किया.

कोई 30 मिनट के बाद हमें ऑर्डर मिला. भारी भीड़ थी. हमने पनीर मटर मसाले और रोटी का पहला निवाला मुंह में डाला ही था कि मन मानों भर सा गया. वह बेहद बेस्वाद भोजन था. रोटी रबड़ जैसी खिंच रही थी और सब्जी का तो समझ ही नहीं आ रहा था कि वह बना क्या था. खैर, हमने कोल्डड्रिंक के सहारे ये खाना खाया. यकीन मानिए इस बेस्वाद खाने का बिल 1500 रुपये पार कर गया था. Baga Beach बेहद क्राउडेड Beach है. यह नॉर्थ गोवा की सबसे हैपनिंग जगह मानी जाती है. गोवा में ट्रैवलिंग सीजन मिड अक्टूबर से मार्च तक रहता है और हम सभी नॉन सीजन में गए थे बावजूद इसके Baga Beach खचाखच भरा दिखाई दे रहा था. लड़कियां मतवाली होकर जहां तहां नाच रही थीं, लड़के भी शराब के नशे में चूर होकर हुल्लड़बाजी कर रहे थे. सब अपनी मस्ती में चूर थे.

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नॉन सीजन होने की वजह से Beach पर Shack बनकर तैयार नहीं हुए थे. अभी कई Shack बन रहे थे. इनकी 5 महीने की कमाई ही सालभर के लिए काफी रहती है. हम वापस आने लगे. काफी चलने के बाद हम फिर से Tito’s Lane से गुजरे. फिर से हवा में कोहरे की तरह उठता धुआं, फिर से शराब की मस्ती, फिर से डांस और डीजे के गाने मेरे कानों में गूंजने लगे. Tito’s Lane से बाहर आकर हमने फिर होटल के लिए टैक्सी की. इस बार हमें टैक्सी 400 रुपये में मिली. रात के 1 बज चुके थे. हम टैक्सी में बैठे और होटल में आ गए.

गोवा (Goa) से चंद घंटों की ये मुलाकात ही मुझे उसका मिजाज बता देने के लिए काफी थी. मैं अब तक सुनते आ रहा था कि न्यू ईयर पर ज्यादातर लोग गोवा (Goa) को ही चुनते हैं. अब देख भी रहा था कि आखिर क्यों यूथ की पहली पसंद गोवा (Goa) रहता है. हम होटल में थे और मैं समाचार चैनल लगाने ही जा रहा था कि पीछे से पीहू ‘छोटा भीम, छोटा भीम’ चिल्लाने लगी. मजबूर होकर मुझे उसी की बात माननी पड़ी. मैं बिस्तर पर गिरा और चंद सेकेंड्स बाद ही मेरी आंख लग गई…

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