मुरारी से बना है बुराड़ी, यहीं पर गैया चराते थे कन्हैया!

दिल्ली के बुराड़ी (Burari) इलाके में पूर्वांचल और उत्तराखंड के लोगों की भरमार है. बुराड़ी (Burari) में पुराने लोग यहां पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से अधिक संख्या में रहते हैं. बुराड़ी (Burari) में लगभग डेढ़ लाख की आबादी है और इस आबादी में अलग अलग संस्कृतियों का संगम साफ तौर से दिखाई देता है. इसपर भी बुराड़ी (Burari) के इतिहास की यात्रा को लेकर जानकारी का अभाव दिखाई देता है. अगर आप भी बुराड़ी का इतिहास या उसकी यात्रा से अंजान हैं तो ट्रैवल जुनून आपको एक काम की जानकारी देने जा रहा है.

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बुराड़ी (Burari) में महाभारत का काल मंदिर है जिसे खंडेश्वर मंदिर कहा जाता है. यह खंडेश्वर मंदिर भगवान शिव का मंदिर है. यही वो जगह है जहां अर्जुन ने भगवान शिव की तपस्या की थी. किवदंती के अनुसार, कृष्ण इसी जगह पर अपनी गैया को चराने आते थे. इसी तर्ज पर इस जगह को मुरारी कहा जाने लगा. मुगल काल में इस जगह को अपभ्रंश कर बुराड़ी (Burari) कहा जाने लगा.

2011 साल की जनगणना के मुताबिक, बुराड़ी (Burari) की आबादी तकरीबन डेढ़ लाख है. बुराड़ी (Burari) से लगते इलाके भलस्वा, जहांगीरपुरी, रोहिणी, निरंकारी कालोनी, मुखर्जी नगर, जगतपुर, किंग्सवे कैंप, जीटीबी नगर, वजीराबाद, नॉर्थ कैंपस, दिल्ली यूनिवर्सिटी है. ये इलाका त्यागियों, गुर्जरों और जाटों के प्रभुत्व वाला इलाका रहा है.

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बुराड़ी (Burari) उत्तर दिल्ली जिले के अंतर्गत आता है और अपने 104 साल पुराने कोरोनेशन पार्क के लिए यह बेहद चर्चित रहा है. कोरोनेशन पार्क ही वो जगह है जहां ब्रिटिश गवर्नर जनरल इरविन ने दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया था. इससे पहले कलकत्ता भारत की राजधानी था. दिल्ली का सबसे बड़ा बायोडवर्सिटी पार्क भी बुराड़ी (Burari) से लगा हुआ है. इसका नाम यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क है. यह यमुना नदी से लगा हुआ है और जीटी रोड इसके पास से गुजरती है.

बुराड़ी (Burari) का मुख्य मार्ग शांति स्वरूप मार्ग उत्तर दिल्ली के लोगों को उत्तर पश्चिम दिल्ली से कनेक्ट करता है.

बुराड़ी (Burari) की धार्मिक स्थिति
2011 की जनगणना के मुताबिक, बुराड़ी (Burari) में हिंदू धर्म को मानने वाले लोग सबसे अधिक संख्या में हैं. हिंदू यहां 93.31 फीसदी की संख्या में है. हिंदुओं के बाद इस्लाम यहां दूसरा सबसे बड़ा धर्म है. इस्लाम को मानने वाले यहां 3.62 फीसदी हैं. इसके बाद ईसाई 1.38 फीसदी, जैन 0.16 फीसदी, सिख 1.45 फीसदी और बौद्ध 1.45 फीसदी हैं. 0.01 फीसदी लोग अन्य धर्मों से हैं.

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इंद्रप्रस्थ
भारत की राजधानी दिल्ली का बीता इतिहास महाभारत काल से जुड़ता दिखाई देता है. इस इतिहास के मुताबिक पांडवों ने इंद्रप्रस्थ का निर्माण कराया था. इस इतिहास के मुताबिक मध्य दिल्ली में चिड़ियाघर के पास स्थित पुराना किला पांडवों की राजधानी रही इंद्रप्रस्थ के स्थल से जुड़ा हुआ है. पांडवों ने ईसापूर्व 1400 वर्ष पहले दिल्ली को अपनी राजधानी इंद्रप्रस्थ के रूप में बसाया था. 1955 में पुराना किला के दक्षिणी पूर्वी हिस्से में पुरातात्विक खुदाई हुई जिसमें मिट्टी के पात्र मिले जो महाभारत काल की वस्तुओं से मेल खाते थे.

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